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Dhar Or Dhar Por Garhwali Kavita Sangrah

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3 नवंबर 2019 हुणि हिंदी और गढ़वालि क वरिष्ठ साहित्यकार दिनेश ध्यानी ज्यूल मिकैं आपण लेखी गढ़वालि कविता संग्रह “धार वोर – धार पोर ” गढ़वाल भवन नई दिल्ली में भेंट करी । 70 कविताओंक य कविता संग्रह में 22 छिटगा कविता लै छीं । ध्यानी ज्यूल य किताब वरिष्ठ साहित्यकार दिवंगत भगवती प्रसाद नौटियाल ज्यूक चरणों में भेंट करि रैछ । नौटियाल ज्यू कि भौत याद ऐ किलै कि एक पत्रिका में उनार और म्यार आँखर दगड़ – दगड़ी छपछी भौत पैली। किताब में वरिष्ठ साहित्यकार मदन मोहन डुकलान ज्यूल भलि भूमिका लेखि रैछ । विशेष बात य छ कि ध्यानी ज्यूल य पोथि में करीब तीन दर्जन कलमकारों, कवियों और पत्रकारों कैं याद करि रौछ जनुमें एक नाम म्यर लै छ ।

कविता संग्रह में सबै कविता एक है भाल एक छीं । कैकि चर्चा करूं और कैकि नि करूं है जांरै । फिर लै कविता वन्दना, धार वोर – धार पोर, बुबा जी, पाणी, नाता -रिश्ता, तेरि याद, भेदभाव, फूलदेई और छिटागा भौत भाल और मार्मिक कविता छीं । कविता वन्दना में मां सरस्वती हैं प्रार्थना छ – ” बेटि – ब्याटा फरक नि हो कखि, जाति – पाति न हंकार हो ।”

एक कविता, कविता संग्रहक नाम पर लै छ, ‘धार वो र – धार पोर’ । कविताक भाव देखो –

“अद बाटम च जिंदगानी
इनै उनै ठौर निरै
धार वोर – धार पोर
झट्ट छंटेनु बसौ नि हवै ।”

कविता ‘लासनौ पात ‘ में य दुख प्रकट है रौछ कि खेति बांजि हैगे और एक लासण क पतेल लै हरै गो । कविता ‘ बुबा जी ‘ भौत मार्मिक छ । बौज्यू कि याद कवि हृदय में जमि हुई छ, ”

“अमणि बुबा जी
नि छन हम्हरा बीच
पण वोंकि बुद्धि -सीख
बा टुल बाथौ पाणी रैंद
हमुथैं दिन रात ।”

कविता ‘ नाता – रिश्ता ‘ लै भौत वेदना भरी कविता छ जमें रिश्तों कि चिंता है रैछ –

“मठु -मठु कै, जरा -जरा कैकि
नाता रिश्ता हर्चंणा छन
पीठि का अपणा भै दगड्या
घड़ि म सोरा हूणा छन ।”

एक छिटगा लै देखो –

” सक अर सुबौ न बढै दे
दूरी हमरा दरम्यान
नथर यथगा बुरु
तु बि नि छै, मि बि नि छौं ।”

उम्मीद करनू कि सब पाठकोंल य कविता संग्रह पढ़न चैंछ । कविताओं में उत्तराखंडक धरातल और खुशबू भौत महकि रैछ । जो लै यूं कविताओं कैं पढ़ल उकैं वांकि अन्वार जरूर मिललि । ध्यानी ज्यू कैं भौत – भौत बधै और शुभकामना । संपर्क – 9968502496, 9319667106.

पूरन चन्द्र कांडपाल

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Description

3 नवंबर 2019 हुणि हिंदी और गढ़वालि क वरिष्ठ साहित्यकार दिनेश ध्यानी ज्यूल मिकैं आपण लेखी गढ़वालि कविता संग्रह “धार वोर – धार पोर ” गढ़वाल भवन नई दिल्ली में भेंट करी। 70 कविताओंक य कविता संग्रह में 22 छिटगा कविता लै छीं। ध्यानी ज्यूल य किताब वरिष्ठ साहित्यकार दिवंगत भगवती प्रसाद नौटियाल ज्यूक चरणों में भेंट करि रैछ । नौटियाल ज्यू कि भौत याद ऐ किलै कि एक पत्रिका में उनार और म्यार आँखर दगड़ – दगड़ी छपछी भौत पैली। किताब में वरिष्ठ साहित्यकार मदन मोहन डुकलान ज्यूल भलि भूमिका लेखि रैछ। विशेष बात य छ कि ध्यानी ज्यूल य पोथि में करीब तीन दर्जन कलमकारों, कवियों और पत्रकारों कैं याद करि रौछ जनुमें एक नाम म्यर लै छ।

कविता संग्रह में सबै कविता एक है भाल एक छीं। कैकि चर्चा करूं और कैकि नि करूं है जांरै। फिर लै कविता वन्दना, धार वोर – धार पोर, बुबा जी, पाणी, नाता -रिश्ता, तेरि याद, भेदभाव, फूलदेई और छिटागा भौत भाल और मार्मिक कविता छीं। कविता वन्दना में मां सरस्वती हैं प्रार्थना छ – ” बेटि – ब्याटा फरक नि हो कखि, जाति – पाति न हंकार हो।”

 

Additional information

Weight .200 g
Dimensions 22 × 14 × 2 cm

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