Meri Bal Kavita Main Balak मेरी बाल कविता मैं बालक

मेरी बाल कविता………..
         मैं बालक…………

Meri Bal Kavita Main Balak मेरी बाल कविता मैं बालकहिन्दू, मुस्लिम,सिख, ईसाई,
             सबमें निज को पाता हूँ ।
मानव का है खून दौड़ता,
            मानव मैं कहलाता हूँ ।।

कहाँ अलग है जन्म किसी का,
         कहाँ अलग है किलकारी ।
पय का पान कराती बोलो,
          कहाँ अलग है महतारी ।।

भारत का मैं पुत्र लाड़ला,
             अन्न इसी का खाता हूँ ।
मानव का है खून दौड़ता ,
              मानव मैं कहलाता हूँ ।।

बन जाऊँगा देव अरे मैं,
          मुझको अगर न बाँटो तुम ।
हिन्दू,मुस्लिम, सिख, ईसाई,
       कहकर कभी न छाँटो तुम ।।

मैं ही तो हूँ राम,किसन भी,
         निज का भाग्य विधाता हूँ ।
मानव‌ का है खून दौड़ता,
        मानव मैं कहलाता हूँ।।

©डा० विद्यासागर कापड़ी
          सर्वाधिकार सुरक्षित

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