O Nirakar ओ निराकार

ओ निराकार........... उगाते हो कौन सी भू पर तुम रजतकण, बिखराते हो किस बिधि से इन गिरि शिखरों पर। तुम ओढ़ाते हो नगेश को धवल आवरण , सुस्पन्दन भर देते…

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Khoj खोज

  खोज.............. माहुर में भी अमिय खोजना,           जो इस उर को आ जाता । तिमिर हारकर , दीपशिखा बन,          जीवन पथ…

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Jab Mahamahim Muskura Uthe जब महामहिम मुस्कुरा उठे

दि0....22/05/2020दिन....शुक्रवार गद्य लेखनविधा..... संस्मरणजब महामहिम मुस्कुरा उठे***************************** बात 5 सितम्बर 2006 की है! जब मैं अपना नेशनल एवार्ड लेने दिल्ली पहुंची थी। पहली बार दिल्ली गई थी, तो उत्सुकता थी । अशोका…

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