—–‘जखोली’—–

-----'जखोली'-----

A Garhwali Poem

By Ashwin Gaur

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ना तुमारु दिल्ली जन,
न देरादूण जन घिचपिच च,
हमारु स्वाणू जखोली त,
लस्या-बांगर का बीच च।

वासुदेव की थाति
बांगर जथ,
बजीरा तरफ
नगेला गीत छिन।

भद्वाणों की वीर नरसिंह,
जात, मेला-थौलो
रीत छिन।

माधो सिग भंडारी
जन्म भूमि या,
इंद्रमणि बडोनीऽ
कर्मभूमि च।

जख मयाळा मनख्यूं
मीठी बोली,
यन स्वाणी थाति
हमारू जखोली ।
यन स्वाणी थाति हमारू जखोली-------अश्विनी गौड,

 


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A Satirical Garhwali Poem

 

 A Satirical Garhwali Poem

By Dharmendra  Negi

 

दिन ढलकण से क्य होण
समौ बदलण से क्य होण

खैरि खैकि मिलण गफ्फा
सुदि डबखण से क्य होण

छोड़ खटुलि बिटौ खंतुड़ि
हौड़ फरकण से क्य होण

पुंगड़्यूं कूरि रौदेड़ु जम्यूं
द्यो बरखण से क्य होण

जिठणा दगड़ि नचै होणी
छौं बरजण से क्य होण

जिकुड़िम छन पित्त पक्यां
मुल मुलकण से क्य होण

च्वट्टा पोड़ण लगिगैनि जब
तब खळकण से क्य होण

पढ़ै - लिखै नौफर चुकपट
जुल्फि झटगण से क्य होण

गंगा जी का जौ ह्वेगेनि जु
वूं तैं जग्वळण से क्य होण

पैलि त निचन्त रै तु 'धरम'
अब भटगण से क्य होण

सर्वाधिकार सुरक्षित :-
धर्मेन्द्र नेगी
चुराणी, रिखणी

 


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पायश पोखड़ा अर पैलगुन पोखड़ा
Pailagun Pokhra

पायश पोखड़ा अर पैलगुन पोखड़ा

गजल द्वारा दिल्ली बिटिन पयाश जी की पोखड़ा तैं पैलागुन। दिनेश ध्यानी। कोटद्वार एक दौं कै आयोजन मा कै भौत बडु आदिमन, जो बरसों बिटिन भाषा आन्दोलन तैं अपणि आवाज…

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मिल भी ज़रा फैशन कैरी

न्याणी क्याणी पैंट पर पर दुई चार छेद जक्खी तक्खी कैरी मिल भी ज़रा फैशन कैरी ता दुन्या से क्या मिल बक्की कैरी साख्युँ बीटी सरसू पुड्या छिन जौकी खट्ल्यूँ…

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