भरच्यांद , भड्यांद  तून लगांद , पित्यांद  अंग्रेजी-शब्द  -गढ़वली में  परिभाषित करते व्यंग्य  शब्दकोश  B-53

भरच्यांद , भड्यांद  तून लगांद , पित्यांद  अंग्रेजी-शब्द  -गढ़वली में  परिभाषित करते व्यंग्य  शब्दकोश  B-53

 

 
 (English -Garhwali  Dictionary of Satire , Sarcasm, 
Aggravating , Galling , Roasting  Definitions   )


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उत्तराखंड परिपेक्ष में मूळा /मूली का इतिहास

 

 

उत्तराखंड  परिपेक्ष में   मूळा  /मूली का इतिहास 

 

 

  उत्तराखंड  परिपेक्ष  में  सब्जियों  का  इतिहास -  6 

  उत्तराखंड में कृषि व खान -पान -भोजन का इतिहास --30

    आलेख :  भीष्म कुकरेती
Botanical Name -  Raphanus sativus 

Common Name -Hilly radish 

मूली या मूळा  एक प्राचीनतम भोज्य पदार्थ है।

मूली व  सबंधी वनस्पति चूँकि जंगली आकार में नही मिलती हैं अत : अभी तक वैज्ञानिक यह पता  असफल हैं कि वास्तव में मूली का मूलस्थान कहाँ है।

कहा जाता है कि मूली का अलग अलग स्थानों में उगी या दो जातियों के मिश्रण से मूली का जन्म हुआ।

इस तरह मूली का  भारत या पूर्व दक्षिण एसिया व भूमध्य सागर -कैप्सियन सागर के पास आलग तरह से जन्म हुआ।

मिश्र में मूली 5 000 हजार साल पहले भोज्य पदार्थ बन चुकी थी। क्योंकि पिरामिडों की दीवालों में मूली के चित्र मिले हैं।

चीन में भी मूली 2000 साल पहले से भोज्य पदार्थ बन चुकी थी।

भारत में भी मूली 2500 पहले भोज्य पदार्थ बन चुकी थी।  आयुर्वेद में मूली का उल्लेख हुआ है.

उत्तराखंड में मूली या तो भारत के उस स्थान से आई जहां इसका उद्गम रहा होगा अथवा सदूर पूर्व दक्षिण एसियाबंगाल, नेपाल होते हुए उत्तराखंड आई और या उत्तर पूर्वी हिमालय में मूला का आकार लेकर उत्तराखंड पंहुची ।

अथवा दक्षिण चीन से तिबत होते हुए उत्तराखंड पंहुची।

यह निश्चित मान सकते है कि मूळा  ने उत्तराखंड में 2000 साल पहले  डेरा डाल  दिया होगा।



Copyright @ Bhishma  Kukreti  4 /10/2013 

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भरच्यांद , भड्यांद  तून लगांद , पित्यांद  अंग्रेजी-शब्द  -गढ़वली में  परिभाषित करते व्यंग्य  शब्दकोश  B-52

भरच्यांद , भड्यांद  तून लगांद , पित्यांद  अंग्रेजी-शब्द  -गढ़वली में  परिभाषित करते व्यंग्य  शब्दकोश  B-52 - - 

 

   (English -Garhwali  Dictionary of Satire , Sarcasm,  Aggravating , Galling , Roasting  Definitions   )

 (गढ़वाली ,  व्यंग्य हंसी , जोक्स ,  चिढ़ाते , धृष्टता करते ,ठट्टा लगाते  , ताना मारते , झिड़कते शब्द -परिभाषा शब्दकोश , व्यंग्यकोश  ) 

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Jealous , जळथमार = जरा तुमर परमोसन ह्वै न कि तुम तै पता चल जालो कि क्वा च 

Jeopardy ,खतरा = कॉंग्रेस कुण मोदी को ज्यादा दिन सत्ता म रौण अर भाजपा कुण क्षेत्रीय पार्टी 

Jerk, झटका = भाजपा कुण शिवसेना कु कॉंग्रेसक दगड़ 

Jister ,मसखरा = राहुल गाँधी 

Jewel,जेवरात = जैम हो वी गुसैं 

Jweller, सुनार = जु अपण बेटी जेवरात बणानम  बि मिलौट करदो 

Job,नौकरी = हर भारतीय की प्रथम प्रार्थना 

Joke, मजाक , लालू यादव , मुलायम का प्रधान मंत्री बणनो सुपिन 

Jokerजोकर = राजनीती म त राहुल गांधी ही माने जालो 

Journalism , पत्रकारिता = जु कार्य पीली , ब्लैमेलिंग , सत्ता की  दलाली  का रूप म आज जादा प्रसिद्ध च 

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Copyright@ Bhishma Kukreti 

गढ़वाली हास्य , गढ़वाली व्यंग्य , ताना मारते , चिढ़ाते , जलाते गढ़वाली,  व्यंग्य, मजाक उड़ाते गढ़वाली व्यंग्यकोश  , Sarcastic definitions in Garhwali 


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भरच्यांद , भड्यांद तून लगांद , पित्यांद अंग्रेजी-शब्द -गढ़वली में परिभाषित करते व्यंग्य शब्दकोश B-51

 

भरच्यांद , भड्यांद  तून लगांद , पित्यांद  अंग्रेजी-शब्द  -गढ़वली में  परिभाषित करते व्यंग्य  शब्दकोश  B-51  

 

   (English -Garhwali Dictionary of Satire, Sarcasm, Aggravating , Galling , Roasting  Definitions   )

 

  ( गढ़वाली ,  व्यंग्य हंसी , जोक्स ,  चिढ़ाते , धृष्टता करते ,ठट्टा लगाते  , ताना मारते , झिड़कते शब्द -परिभाषा शब्दकोश , व्यंग्यकोश   ) 

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Isolation,अलगाव = जु  तुम शहरों म रौणै लाळसा करदा 

Itch, खज्जी = बहुत दर्दीली हाँ कखम लग पर निर्भर 

Ivory,हठी दांत = जु नई पीढ़ी वळुं नि देखि किलैकि सर्कस म जानवर नि दिखान्दन अब 

Jabber, गपशप = संसद म जु संसद करणा रौंदन 

Jack , जैक = गठबंधन सरकारं निर्दलीय विधायक या सांसद 

Jackass , गधा = बिचारो जु ओफिस म सबसे अधिक काम करद 

Jaded , थकायुं = महाराष्ट्र म देवेंद्र फडणवीस 

Jam,जाम = शहरों की फितरत 

Janitor , चौकीदार = राहुल गांधी की चिरड़ 

Jaw, जबड़ा = बडबोलाओं बंद ही हूण  चयेंद 

 

 

 

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Copyright@ Bhishma Kukreti 

गढ़वाली हास्य , गढ़वाली व्यंग्य , ताना मारते , चिढ़ाते , जलाते गढ़वाली,  व्यंग्य, मजाक उड़ाते गढ़वाली व्यंग्यकोश  , Sarcastic definitions in Garhwali 

 


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उत्तराखंड परिपेक्ष में जिमीकंद/सोरण का इतिहास

    उत्तराखंड  परिपेक्ष में   जिमीकंद/सोरण  का इतिहास 

    उत्तराखंड  परिपेक्ष  में  सब्जियों  का  इतिहास -  5 

    उत्तराखंड में कृषि व खान -पान -भोजन का इतिहास --29

      आलेख :  भीष्म कुकरेती  

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Botanical Name - Amorphophallus campanulatus

Common Name- Elephant foot yam 

जिमीकंद उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में  खाया जाता था।  अब मैदानों से पहाड़ी इलाकों में भी  बननी शुरू हो गयी है।

जिमीकंद की खेती या एकत्रीकरण देहरादून , हरिद्वार , उधम सिंह नगर और भाभर इलाके में अच्छे स्तर पर होती है।
 
जिमीकंद का जन्मस्थल पूर्वी दक्षिण एसिया के मलेसिया क्षेत्र है . जंगली जिमीकंद हजारो साल पहले इन क्षेत्रों में पाया जाता था। भारत में जिमीकंद कई हजार साल पहले आ चुका था। ए.  वी . सम्भमूर्ति और सुब्रमनियम मानते हैं कि जिमीकंद भारत में जन्मा वनस्पति है।

हो सकता है कि जिमीकंद का खाद्य उपयोग भारत में हुआ हो।

 

वैदिक भारतीय जिमीकंद का उपयोग करते थे।  संस्कृत में जिमीकंद के कई नाम हैं जैसे आलू , सुकन्दिन , कंठाल सुरःण , अर्साघना  आदि । 
जिमीकंद का आयुर्वेद में स्वास , आंतो व पेट की बीमारियों की दवाइयों में उपयोग होता था। 

निघन्टू साहित्य में भी जमीकंद का उल्लेख मिलता है।



Copyright @ Bhishma  Kukreti  3 /10/2013
              


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गढ़वली में परिभाषित करते व्यंग्य शब्दकोश B-50

भरच्यांद , भड्यांद  तून लगांद , पित्यांद  अंग्रेजी-शब्द  -गढ़वली में  परिभाषित करते व्यंग्य  शब्दकोश  B-50  

 

   (English -Garhwali  Dictionary of Satire , Sarcasm,  Aggravating , Galling , Roasting  Definitions   )

 

  ( गढ़वाली ,  व्यंग्य हंसी , जोक्स ,  चिढ़ाते , धृष्टता करते ,ठट्टा लगाते  , ताना मारते , झिड़कते शब्द -परिभाषा शब्दकोश , व्यंग्यकोश   ) 

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संकलन व अनुवाद - भीष्म कुकरेती 

 

Invalid , अमान्य = बगैर बतयां अयां मेमानों बहाना 

Invertebrate रीढ़बिहीन = पत्नी क समिण पति 

Investigation सरकारी जांच पड़ताल = फोकट का दिखावा 

Invisible अदृश्य = पार्टी म मि 

Invitation निमंत्रण /न्यूत = जु  मि  तै पार्टी कुण नि  मिल्दो 

Irony,बिडंबना = हम तै वोट देकि  बि संतुष्टि नि  हूंदी 

Irrational, तर्कहीन = पति क  समिण पत्नी का तर्क  

Irresponsible, गैर जुम्मेवार =  राजनीतिज्ञ 

Irreversible अचल = पत्नी का तर्क 

Irritable चिड़चिड़ा = मि जब सुबेर  बिजण  इ पोड़द 

 

 

Copyright@ Bhishma Kukreti 

गढ़वाली हास्य , गढ़वाली व्यंग्य , ताना मारते , चिढ़ाते , जलाते गढ़वाली,  व्यंग्य, मजाक उड़ाते गढ़वाली व्यंग्यकोश  , Sarcastic definitions in Garhwali  

 


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गढ़वाल -कुमाऊं के लोक खेल -भाग -1

गढ़वाल -कुमाऊं के लोक खेल -भाग -1

           Folk Games of Garhwal, Kumaon (Uttarakhand ) -1

 

            संकलन - भीष्म कुकरेती (लोक साहित्य शोधार्थी )

 

                       खेल की परिभाषाएं
   

खेल मानव का एक लक्षण है।  हर युग में लोक खेल परिमार्जित होते रहे हैं और भविष्य में भी लोक खेल मानव समाज में आते रहेंगे। 

 

खेल एक कार्य है जिसका उद्येस्य मनोरंजन या शिक्षा या दोनों होता है। खेल वास्तव में रचनात्मकता , कला निहित है जिसमे जिस्मानी शक्ति , मानसिक शक्ति व टीम भावना का समिश्रण होता है।

खेल में समय और जगह आवश्यक कारक हैं।  

खेल का प्रतिफल अनजान है जो क्षेल को रोमांचक बना डालता है।

लोक खेलों में खेल में उत्पादकशीलता नहीं होती है और कभी कभी जब खेल व्यसन का रूप ले ले तो अलाभकारी भी हो सकता है।

खेल में नियम अवश्य होते हैं।

खेल में प्रतियोगिता  निहित है किन्तु इसे युद्ध कदापि नही कहा जा सकता है।  

खेल में प्रतिद्वंदिता व प्रतियोगी, प्रतिरोध , प्रतिरोध समाधान आवश्यक हैं।

खेल में गोल और खेल का आकार महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।

खेल में आधुनिक तकनीक का समावेश भी होता जाता है जैसे आज वीडिओ गेम। या तीर कमान खेल में आधुनिक तकनीक का समय समय पर प्रयोग।

खेल में कम से कम दो खिलाड़ियों का होना लाजमी है। जब एक खिलाड़ी किसी खेल में होता है तो वह एक विशेष तरह का खेल माना जाता है जैसे एक आदमी बाग़ बकरी का खेल दो खिलाड़ियों की तरफ से खेले।

खेल खिलाड़ियों और दर्शकों को आनंद पूर्ति करता है।

खेल में चुनौती , बातचीत , एक दूसरे को प्रभावित करना , मानसिक या शारीरिक संवाद भी आवश्यक हैं।

खेल सदा से ही एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्रों में प्रसारित होते जाते हैं और बहुत से समय बदलाव के कारण क्षेत्रीय लोक खेल के रूप में प्रसिद्ध हो जाते हैं जैसे गंगासलाण , पौड़ी गढ़वाल में हॉकी को बदलकर एक नया खेल उत्पन्न हुआ जिसे हिंगोड़ कहते हैं और इसी तरह रग्बी ने हथगिंदी का रूप लिया।  युद्ध खेल ने गढ़वाल -कुमाऊं  में सरौं नृत्य रूप ले लिया। 

 

उत्तरा खंड  के लोक खेल , गढवाल के लोक खेल , कुमाऊँ के कुछ लोक खेल

१- गारी खिलण - Ggari Khilan

२- बाग़ बकरी को खेल - Bak BAKHRI KU KHEL

३- लुक्का छुपी --Luka Chippi, Hide & Seek 

४- काणो बौणिक पकड़ण- Kano Baunik Pakdan, Catch as being Blind 

४अ- पकडवा पकड़ - Pakdwa Pakad

५- इकटंड़या - Iktangdya

६- छौम्पा दौड़ -Chhaumpa Daud

७- रिंगण -Ringan

८- फाळ मारण -Falh Maran Jumping 

९- कुद्दी मारण - Kuddi Maran,  High Jump 

१०- झुळी खिलण - Jhilli khilan

११- रीठा भैन्स्वळ कु गुच्छी क खेल - Reetha Bhainswal ku Gucchhi Khel

१२- गुल्ली डंडा कु खेल -Gulli Danda

१३- हथ गिंदी खिलण -Hath Gindi

१३अ- पत्थर की ढेरी गिंदी से फुडणो खेल Patthar ki Dheri tain Gindin Fudno khel

१४- खुट गिंदी खिलण -Khutt gindi , Football 

१५- हिंगोड़ -Hingod , Hockey 

१६- बा कटण (तैराकी )-Baa katan -swimming

१७- नाव चलाण -Nau chalan, Boating 

१८- पत्थर घुरैक चुलाण -Patthr ghuraik Culan

१९- पटाळ /घास मा रौड़ण -Patal Ghas ma raudan

२०- अयेड़ी खिलण - Ayedi khiln -Hunting

२१- माछ मारण -Machh maran -Fishing

२२- खाडू बुखटयौ   तैं लड़ाण - Khadu/BUKHTYA ladan--FIGHT OF RAM/HE GOAT

२३- रसा कस्सी - RASA KASSI, Tug of War 

२४- तास खिलण - Tass, Card playing 

२५- चौपड /कौडी कु खेल = Chaupad/Kaudi ku KHEL

26 इची दुची 

27 डाळ  म झुंटा  खिलण  Swinging on tree  branch 

 


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उत्तराखंड  परिपेक्ष में तैड़ू /रतालू   का इतिहास 

 

 उत्तराखंड  परिपेक्ष में तैड़ू /रतालू   का इतिहास 

 

उत्तराखंड  परिपेक्ष  में  सब्जियों  का  इतिहास -  4

   
उत्तराखंड में कृषि व खान -पान -भोजन का इतिहास --28

                                              
आलेख :  भीष्म कुकरेती

Botanical Name- 
Dioscorea belophylla, D.deltodia

Common Name- Spear Leaved yam , White Yam 

Hindi name-Tarur 

Sanskrit name - Shankhaluka  , Varahikand 

 

   दुनिया में तैड़ू /रतालू की पैदावार सभी कंद मूल (Tubers and Bulbs ) में उत्पादन में चौथे नम्बर पर आता है।
तैड़ू /रतालू या Dioscorea की 600 species हैं।
तैड़ू /रतालू लाखों साल पहले इस धरती पर आ चुका था. कुछ वैज्ञानिक पश्चिम अफ्रिका व कुछ पूर्वी दक्षिण एसिया को तैड़ू /रतालू का जन्म स्थल मानते हैं।

पश्चिम अफ्रीका में  मनुष्य 50000 BC में तैड़ू /रतालू का उपयोग करते थे।

3000 BC पहले अफ्रिका और दक्षिण एसिया में कृषिकरण शुरू हुआ और भारत में 2000 BC पहले तैड़ू /रतालू की खेती शुरू हो चुकी थी .

उत्तराखंड में भी मानव तैड़ू /रतालू का उपयोग  खाद्य पदार्थ के रूप में 2000 BC शुरू कर चुका होगा।

तैड़ू /रतालू की सैकड़ों जातियां हैं। संस्कृत या आयुर्वेद में तैड़ू /रतालू को आलूका , कास्टआलुका ,हस्त्यालुका आदि कहा गया है
संस्कृत में तैड़ू का नाम वराहकंद भी जिसका अर्थ होता है सुअर का प्रिय कंद।  चरक , सुश्रुआ संहिता व कई निघण्टुओं  में तैड़ू का जिक्र ही नहीं अपितु औषधि गन पर भी उल्लेख हुआ हुआ है। 

उत्तराखंड में तैड़ू /रतालू जाड़ों व शिव रात्रि की एक महत्वपूर्ण सब्जी रही है किंतु उत्तराखंड में तैड़ू /रतालू की खेती नही की जाती, हाँ कहीं कहीं घर के पास कटघळ के पास तैड़ू  खड्यार कर खेती होती है किन्तु मुख्यतया  तैड़ू /रतालू के लिए जगंल पर ही निर्भर रहना पड़ता है। उत्तराखंड में ब्रिटिश काल तक  भी तैड़ू  मुख्य सब्जियों में से एक सब्जी थी। तैडू का आटा भी बनाया जाता था।  

गढ़वाली में रतालू का नाम तैड़ू  क्यों पड़ा इस पर अभी खोज होनी बाकी है।

मेरा एक विचार है कि तैड़ू का नामकरण खस काल, महाभारत काल या प्रस्तर कुलिंद काल  में होगा। शब्दांत में ड ,   खस या द्रविड़ भाषा का द्योतक है , तो कह सकते हैं तैड़ू महाभारत काल का शब्द है या खस कालीन शब्द है 

किन्तु फिर प्रश्न उठता है कि अन्य प्राचीनतम खाद्य पदार्थों या अनाजों के खस कालीन या कुलिन्दकालीन या कैंत्युरी कालीन नाम गुम  कैसे हो गए ?

 

 उत्तराखंड में रतालू की सब्जी कई तरह से बनाई व उपयोग होता है। 

छीलकर काटकर सब्जी बनाना 

कंद को भड्या  /भूनकर  खा जाना 

उबालकर छीलकर ,  काटकर नमक मिलाकर खा जाना 

उबालकर छीलकर  , काटकर सूखी सब्जी बनाना जैसे आलू के गुटके अथवा पंद्यरी / रसदार सब्जी बनाना  

कच्चे रतालू को छीलकर थिंचोणी  बनाना 

अन्य सब्जियों जैसे आलू , अरवी आदि के साथ मिश्रित सब्जी 


                                                 

Copyright @ Bhishma  Kukreti  1/10/2013 

 


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गढ़वली में परिभाषित करते व्यंग्य शब्दकोश B-49

भरच्यांद , भड्यांद  तून लगांद , पित्यांद  अंग्रेजी-शब्द  -गढ़वली में  परिभाषित करते व्यंग्य  शब्दकोश  B-49 

 

   (English -Garhwali  Dictionary of Satire , Sarcasm,  Aggravating , Galling , Roasting  Definitions   )

 

  ( गढ़वाली ,  व्यंग्य हंसी , जोक्स ,  चिढ़ाते , धृष्टता करते ,ठट्टा लगाते  , ताना मारते , झिड़कते शब्द -परिभाषा शब्दकोश , व्यंग्यकोश   ) 

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         संकलन - भीष्म    कुकरेती   

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Interpretation , व्याख्या, टीका = अधिकतर गलत 

Interrogation,= पूछताछ = दुसर देश म न्यायिक ही हूंद 

Interview, साक्षात्कार = मैनेजरों द्वारा पूछताछ से ज्यादा तर अभ्यार्थियों समय बर्बाद करणो तरीका  

Intimacy ,आत्मीयता = अधिकतर संबंधुं   म नि पाए जांद 

Intimidation = धमकी = भौत सा लोग खाली यी दींदन करदा कुछ नई छन 

Intolerant ,असहिष्णु = जु तुम मथि  से फील करदा 

Intoxicating , नशीली = सच्चो प्यार 

Intriguing पेचीदा , जटिल =  आधुनिक रहस्य्पूर्ण उपन्यासों का  बिलकुल उल्टो 

Intrusion , अतिक्रमण = अधिकतर  वर्तमान  राजयपालों कर्तव्य 

Invader   , आक्रमणकारी =  मेहमान जु  बगैर सूचना का    जांदन 

 

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Copyright @ Bhishma Kukreti 

 गढ़वाली हास्य , गढ़वाली व्यंग्य , ताना मारते , चिढ़ाते , जलाते गढ़वाली,  व्यंग्य, मजाक उड़ाते गढ़वाली व्यंग्यकोश , Sarcastic Definitions in Garhwali 


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अर्धग्रामेश्वर नाटक के कालकर व सहयोगी

 

 अर्धग्रामेश्वर नाटक के  कालकर व सहयोगी 

 

 ( गढ़वाली नाट्यकर्मी -2 ) 

  - भीष्म कुकरेती 

  आधुनिक गढ़वाली  नाटकों में अर्धग्रामेश्वर एक मील का पत्थर  साबित हुआ।  इस नाटक के प्रथम मंचन में निर्देशक , कलाकारों व सहयोगियों का ब्यौरा इस प्रकार है 

लेखक राजेंद्र धस्माना 

निदेशक - मित्रा नंद कुकरेती 

गीत , संगीत - महेश तिवाड़ी 

कलाकार -

सूत्रधार - महेश बुड़ाकोटी 

पं  महिमानंद - खुशाल सिंह बिष्ट 

सतयनारायण ( अधिकारी )- संजय बिष्ट 

नैन सिंह - रवींद्र गौड़ 

प्रो विद्यासागर - हरी  सेमवाल 

सूरदास - कृपाल सिंह रावत 

कुंदन की मां - सुशीला रावत 

कल्पी - कुसुम  बिष्ट 

सुमति -  मंजू बहुगुणा 

राजेश्वरी - संयोगिता पंत ध्यानी 

ग्राम प्रधान अनसूया - ब्रिज मोहन शर्मा 

शकुन्ति - धनेश्वरी नैथानी 

मातवर - दिनेश कोठियाल 

मेहरबान - गिरीश बिष्ट 

गरीब - गिरीश बलूनी 

पतरोल - डा हरेंद्र असवाल 

प्रताप - श्याम सिंह रावत 

वीएलडब्ल्यू - सतीश भंडारी 

 

 

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Copyright@ Bhishma Kukreti 2019 

Garhwali Dramatists  , Garhwali Drama activists 

 


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