O Nirakar ओ निराकार

ओ निराकार........... उगाते हो कौन सी भू पर तुम रजतकण, बिखराते हो किस बिधि से इन गिरि शिखरों पर। तुम ओढ़ाते हो नगेश को धवल आवरण , सुस्पन्दन भर देते…

Continue Reading

Khoj खोज

  खोज.............. माहुर में भी अमिय खोजना,           जो इस उर को आ जाता । तिमिर हारकर , दीपशिखा बन,          जीवन पथ…

Continue Reading
Close Menu
×
×

Cart